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History Of college

स्थापना के समय प्रारंभ में तीन-तीन आई ए एस पदाधिकारियों ने निष्पक्ष रूप से अंतवृक्षा के आधार पर सात शिक्षकों की नियुक्ति का अनुमोदन किया था | ४.६.१९५९ से २३.3.१९६३ तक बाल मध्य विद्यालय के छोटे प्रांगण में नगरपालिका के सहयोग से प्रातः काल कला संकाय के वर्ग एवं संध्या काल में वाणिज्य संकाय के वर्ग चलाये जाते रहे |कुछ शिक्षकों को सुबह साम महाविद्यालय का काम करना पड़ता था | अधिकाधिक काम करना हमारी विशेषता रही है | कोशी – पीड़ित क्षेत्र के नागरिको के उत्साह उच्च मनोबल के कारण ही कॉलेज दिनादुन विकसित होता रहा। इससे पूर्व इस विस्तृत बालुकामय भूमि के चारों और उच्च शिक्षा का केन्द्र नहीं था|सर्वप्रथम तत्कालीन पूर्णियां जिले के उत्तरांचल में इसी कॉलेज की स्थापना हुई और शिक्षा के क्षेत्र में यहाँ के पिछहैं लोगों को ज्ञान का प्रकाश मिला । यहाँ का उत्तम परीक्षाफल, अनुशासन, संगठन एब्र शिक्षणेत्तर कार्यकलाप इस क्षेत्र के लिए प्रशंसनीय रहा हैं। छात्रों एवं शिक्षकों के सहयोग ने काँलेज का विकास ही रहा है। यहाँ के शिक्षक राज्य सरकार को सेवा से लेकर विदेशी सैवा तक में कार्यरत रहे । भागलपुर एवं मिथिला विश्वविद्यालय में हिन्दी, मैथिली एबं उर्दू प्रतिष्ठा के छात्रों का कई वार प्रथम श्रेणी में स्थान प्राप्त हुए है और पुरस्कृत भी हुए हैं। भाव अभावों में भी साधना ही हमारी पूजा-उपासना का प्रमुख अंग रहीं है। पूर्व में अर्चना (कॉलेज पत्रिका) का प्रथम प्रकाशन हुआ था । दूसरा अंक भी प्रकाशित हा गया हैं।महाविद्यालय की स्वर्णजयन्ती (2009) कं अवसर पर एक स्तरीय स्मारिका का प्रकाशन किया गया ।